हिमाचल के लिए आपदा: 73 साल का अनुदान बंद, वित्तीय संकट गहरा

हिमाचल के लिए आपदा: 73 साल का अनुदान बंद, वित्तीय संकट गहरा
Shubhi Bajoria 26 मार्च 2026 20 टिप्पणि

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक मशीनरी को एक जबरदस्त झटका लगा है। 16वां वित्त आयोग ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिससे राज्य को 73 सालों बाद पहली बार 'रेवेन्यु डिफिसिट ग्रैंट' (RDG) नहीं मिलेगी। यह निर्णय सीधे तौर पर 2026 से 2031 तक के आर्थिक वर्षों को प्रभावित करता है, जो राज्य की अस्थायी स्थिति को और अधिक भंगुर बना देता है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर पार्टी की बैठक बुलाई है और कहा है कि यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि जनता के भविष्य से जुड़ा मामला है।

परिस्थिति इतनी गंभीर है कि 2019 से 2025 के बीच राज्य को लगभग 48,000 करोड़ रुपये इसी योजना के तहत मिल रहे थे। अब जब रास्ता रुका है तो अगले पांच वर्षों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया है। कुल दायित्व आज 1.03 लाख करोड़ रुपये के आसपास है और अब अमेरिकी डॉलर के हिसाब से भी यह बोझ भारी होता जा रहा है।

73 साल पुराना सिलसिला टूटा

यह केवल एक साधारण बजट का मुद्दा नहीं है। यह 1952 से चालू हुआ रिवाज था कि केंद्र सरकार हरियाणा और अन्य छोटे राज्यों की तरह हिमाचल को नुकसान भरने के लिए पैसा देती थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, हिमाचल प्रदेश सरकार ने इसे "आर्थिक शोषण" करार दिया है। उन्होंने बताया कि राज्य कभी भी आय धारक इकाई के रूप में डिजाइन नहीं किया गया था, इसलिए ऐसे अनुदान पर निर्भर रहना अनिवार्य था।

दूसरी ओर, उपायुक्त और विपक्ष के नेताओं की भी ध्यानपूर्वक गणना होती रही है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दावा किया है कि राजस्व की कमी अब 10,000 करोड़ रुपये की हो चुकी है। उनकी मानें तो केंद्र द्वारा यह कदम विशेष रूप से कांग्रेस शासित राज्यों को कमजोर करने की योजना का हिस्सा है। हालांकि, केंद्र सरकार का कोई स्पष्ट बयान अभी जारी नहीं हुआ है।

संसद में राजनीतिक लड़ाई

इस वित्तीय बवाल का असर सीधे विधान सभा में दिखा। हिमाचल विधान सभा बजट सत्रशिमला की शुरुआत 16 फरवरी 2026 को हुई थी, जहां दोनों पार्टियों के बीच जबरदस्त बहस देखने को मिली। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सभी दलों की बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया था। वे 13 फरवरी को आई थीं लेकिन कुछ घंटों में ही वापस चली गईं।

  • भाजपा के विधायकों का कहना था कि वे केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं खड़े हो सकते।
  • उधर, जय राम ठाकुरविपक्ष के नेता ने गृह मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा कि उन्हें क्यों शामिल नहीं किया गया।
  • सभापति कुलदीप सिंह पठानिया ने बहस चलाने की अनुमति देते हुए इसे नियमित कार्यवाही बता दिया।

इस बीच, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खाड़े और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दिल्ली में मुलाकात करके मामले को केंद्र तक पहुंचाने की कोशिश की गई।

अक्टूबर का बजट और कड़ी स्थिति

अक्टूबर का बजट और कड़ी स्थिति

21 मार्च 2026 को जब मुख्यमंत्री ने बजट पेश किया, तो संख्याएं चौंकाने वाली थीं। कुल बजट 54,928 करोड़ रुपये का था, लेकिन इसमें राजकोषीय घाटा 9,698 करोड़ रुपये का आंकड़ा शामिल था। आम जनता के खर्च के हिसाब से देखा जाए तो हर 100 रुपये में से 27 रुपये केवल वेतन पर खर्च होंगे।

मंडी में वर्षा के दौरान हुए बाढ़ संबंधी मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1,500 करोड़ रुपये की घोषणा की थी, लेकिन अभी वह धनराशि भी पूरी नहीं मिली है। यह स्थिति यह स्पष्ट करती है कि राज्य के पास बैकअप विकल्प बहुत कम हैं। अगर RDG बहाल नहीं हुआ तो विकास कार्यों में ठहराव जरूर आएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

रेवेन्यु डिफिसिट ग्रैंट क्या होता है और इसकी जरूरत क्यों होती है?

यह केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने वाला सीधा अनुदान है जो उन राज्यों को मिलता है जिनकी अपनी आय खर्च से कम होती है। हिमाचल जैसे क्षेत्रीय बाधाओं वाले राज्यों के लिए यह विकासात्मक कार्य करने के लिए जरूरी होता था।

क्या हिमाचल सरकार कर्ज चुका पائएगी?

वर्तमान में कुल ऋण 1.03 लाख करोड़ रुपये है। बजट में ब्याज भुगतान के लिए 13 रुपये प्रति 100 रुपये आवंटित किए गए हैं, लेकिन RDG बंद होने से यह चुनौती और बढ़ सकती है।

विपक्षी पार्टी का इस मामले में क्या रुख है?

भाजपा के विधायक विरोधाभासी स्थिति में फंस गए हैं क्योंकि वे अपने ही केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन नहीं कर सकते और राज्य के हित में आवाज नहीं उठा सकते। उन्होंने सभी दलों की बैठक छोड़ दी थी।

अगले चरण में क्या कदम उठाए जाएंगे?

मुख्यमंत्री सुखू ने प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की अपील की है और संसद में विवादित विधेयक पारित कराने की कोशिश करेंगे ताकि 275 और 280 अनुच्छेदों के तहत अधिकार फिर से सक्रिय हों।

20 टिप्पणि
jagrut jain मार्च 26 2026

सरकार के बजट की सच्चाई तो अब साफ़ नज़र आ रही है।

Pankaj Verma मार्च 28 2026

रेवेन्यु डिफिसिट ग्रैंट का सिस्टम 1952 से चल रहा था अब अचानक बदला।

इससे हिमाचल की आय और खर्च में जो खाई थी वो भरती थी।
अब 50 हजार करोड़ का अनुमान खो गया है।
भ्रष्टाचार या कमजोरी जवाब नहीं देगी।
बजाय फंडिंग की समस्या ढूंढने कोशिश करें।

Pradeep Maurya मार्च 29 2026

हिमाचल प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति को समझना बहुत जरूरी है।
सत्ता पक्ष के पास अब राहत के कोई रास्ते नहीं दिखाई दे रहे हैं।
केंद्र सरकार ने जो फैसला लिया वह ऐतिहासिक माना जा सकता है।
73 साल के रिवाज़ को तोड़ना आसान काम नहीं होता।
यहाँ के लोगों के लिए यह एक बड़ा झटका है।
स्कूलों के बच्चों और दूरदराज के गांवों पर असर पड़ेगा।
सरकारी अस्पताल भी अपने रोज़ाना खर्चे के चक्कर में फंस जाएंगे।
वेतन भत्ते पर खर्च 27 रुपये प्रति 100 रूपये होने वाला है।
अगर यह गिरा तो शिक्षकों का भविष्य उधेड़बूट हो जाएगा।
पर्यटन उद्योग भी अपनी मार खा सकता है।
हिमाचल का अपना कोई उत्पादन आधार नहीं है।
इसलिए केंद्र पर निर्भर रहना अनिवार्य था।
आपदा की घोषणा करने से पहले ही तैयारी करनी चाहिए।
प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई ठोस कार्य योजना प्रस्तुत नहीं की।
जनता की जिम्मेदारी बनती है कि वे आवाज़ उठाएं।
विकास कार्यों में ठहराव लायक बात है।
अंत में समाज को ही भार उठाना पड़ेगा।
उम्मीद है कि समय के साथ थोड़ा सुधार आएगा।

priyanka rajapurkar मार्च 30 2026

तो अब सभी को खुशी-खुशी बिल भरना पड़ेगा क्या?
यह तो लग रहा है कि राजनीतिक खेल का शिकार किसी और के ऊपर डाल दिया गया।
क्या पैसे मिले थे ना उनको फिर लौटाओ मतलब?

Ashish Gupta अप्रैल 1 2026

भाई ये खबर बहुत दुःखदायक है 😢😢
हिमाचल वाले भाई बंदे मुश्किल में हैं 😰
सरकार कुछ कर ले 🙏🙏
पार्टी का मामला नहीं है यह पूरा देश देख रहा है 😊😊

Sathyavathi S अप्रैल 2 2026

भाग्यवान कहिए कि इसकी वजह से अगले पांच साल खत्म हुए।
रोक थाम लग गई है और सब खिन्न हैं।
मेरे मन को बहुत तकलीफ हुई जब मैंने यह पढ़ा।
यह तो जैसे जीवन से निशाँ कर दिया गया हो।
मुझे नहीं लगता कि कोई अच्छी बात बाकी रह गई है।

megha iyer अप्रैल 4 2026

सरकारी पैसों का यह खेल बहुत बुरा है।
छोटे राज्य पीछे छूट गए हैं।
कुछ समझदार लोगों को सोचना चाहिए।
विकास कैसे होगा अगर पैसा न आए।
यह सही नहीं है कि सब छोड़ दिया जाए।

Pankaj Verma अप्रैल 4 2026

मेरे विज्ञान में यह स्पष्ट है कि RDG सीधा फॉर्मूले पर चलता है।
वहां नियम बदले जाने से परिणाम बदले।
कानून और वित्त आयोग के फैसले बाध्यकारी होते हैं।
अब केंद्र को दोबारा लॉबी करना पड़ेगा।
राज्य सरकार को नई रणनीति बनानी होगी।

Anil Kapoor अप्रैल 5 2026

आप लोग सोचते नहीं हैं कि ये सब फांसद है।
पैसे वापस मांगने का समय नहीं है।
जिन्होंने इंतजार किया उनकी गलती थी।
भविष्य में कोई ऐसा फंदा नहीं फंसेगा।
सब अपनी मेहनत से चलें।

Suraj Narayan अप्रैल 6 2026

घबराहट मत रखियेगा हर चीज का सल्युशन निकल आता है।
सरकारें नए तरीके ढूंढने में माहिर होती हैं।
समस्याओं से नए अवसर निकलते हैं।
हिमाचल की धातु और जलवायु सबसे अलग है।
इसका उपयोग कर सकते हैं।

Paul Smith अप्रैल 7 2026

राज्या सरक़ ने बुरी तरह हार मान लिया है。
हम लोग चिन्ता कर रहे है कि क्या होगा।
पैसो नहीं मिलेगा तो कैसे बचेगे?
सरकार की सोच बहुत गुल्लक वाली है。
हमें अब नया रस्ता दिखना बचा।

Rashi Jain अप्रैल 8 2026

यह पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए गहन अध्ययन चाहिए।
बजट में घाटा 9698 करोड़ का आंकड़ा है।
राजकोषीय स्थिति बहुत नाज़ुक हो चुकी है।
हर क्षेत्र में कटौती की गुंजाइश नहीं बची।
कर्मियों को बर्खास्त करना नहीं चाहिए।
वैकल्पिक आय स्रोतों पर ध्यान देना पड़ेगा।
पर्यटन और हाइड्रो पावर पर भरोसा करना होगा।
इसे लागू करने में समय लगेगा।
फिर भी हमें आशावाद बनाए रखना चाहिए।
सरकार को अपनी ओर से पहल करनी होगी।
लोक हित में ही निर्णय लेने चाहिए।
जनता की आवाज़ का हिसाब होना चाहिए।
वित्तीय आयोग के नवीन नियमों का पालन करें।
इससे भविष्य की नींव मजबूत होगी।
हम सब को मिलकर चलना पड़ेगा।

Santosh Sharma अप्रैल 9 2026

मुझे लगता है कि ये सब बातें बहुत गंभीर हैं और हमें सही दिशा दिखानी चाहिए।
वो भी समय है जब लोग थोड़ा सोचते।
न जाने क्या होगा आगे।
सब ठीक हो जायेगा भरोसा रखे।

ANISHA SRINIVAS अप्रैल 9 2026

दोस्तों बहुत डरा देने वाली स्थिति है 😬
हमें साथ खड़ा होना चाहिए 👍
सरकार से सही मांग करें 🙏
उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा ✨

Suman Rida अप्रैल 11 2026

यह मुद्दा बहुत गहरा है और ध्यान से सोचना पड़ेगा।
समय बीत रहा है और तनाव बढ़ रहा है।
मुझे लगता है शांति से बैठकर विचार करें।
कोई भी तीव्र कदम उठाने की आवश्यकता नहीं है।
सरकार को विश्वास रखना चाहिए।

Pranav nair अप्रैल 12 2026

भाई ठीक है सब धैर्य रखो 🤝
कहीं ना कहीं रास्ता निकलेगा 🙂
धन्यवाद जानकारी के लिए 👌

Dr. Sanjay Kumar अप्रैल 14 2026

एक बड़ा आर्थिक आपदा इससे जुड़ रही है।
यह केवल एक बजट नहीं बल्कि भविष्य का सवाल है।
जनता की आशाओं पर पानी फेर दिया गया।
यदि तुरंत मदद नहीं मिली तो स्थिति बिगरेगी।
यह एक चेतावनी है हमारे लिए।
निष्कर्ष बहुत खतरनाक लग रहा है।

Arumugam kumarasamy अप्रैल 16 2026

राष्ट्रीय हित में यह फैसला लिया गया है।
प्रादेशिक स्वार्थों का दायरा सीमित होना चाहिए।
केंद्र का अधिकार है कि वह तटस्थ बनाये।
हिमाचल को अपनी ताकत दिखानी चाहिए।
बाहर के सहायक नहीं बंधने चाहिए।
यही मार्ग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सही है।
किसी को शिकायत करने का कोई औचित्य नहीं।

sachin sharma अप्रैल 17 2026

दूसरी पार्टी का दावा भी महत्वपूर्ण है।
उनका कहना है कि यह राजनीति है।
लेकिन असली कारणों की जांच होनी चाहिए।
सच कभी कभी छिपा रहता है।

Yogananda C G अप्रैल 17 2026

यह स्थिति अब बदलने वाली है।
नए कदम उठाए जा रहे हैं।
हमें इंतज़ार करना होगा।
सकारात्मक सोच रखें।
भविष्य उज्ज्वल है।
हमारे पास और विकल्प हैं।
आपकी राय जानना चाहेंगे।
समय बदलता है।
मैं आपके साथ हूं।
शुभकामनाएं।
सब ठीक होगा।
विश्वास रखें।
अगले वर्ष देखना होगा।
सिर्फ इतना कहता हूं।
देखते रहें।

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