राज्यसभा में 7 AAP सांसदों का बीजेपी विलय, राघव चड्ढा सहित

राज्यसभा में 7 AAP सांसदों का बीजेपी विलय, राघव चड्ढा सहित
Shubhi Bajoria 5 मई 2026 0 टिप्पणि

नई दिल्ली की राजनीति में एक बड़ा झटका लगा है। C.P. Radhakrishnan, Rajya Sabha Chairperson ने शुक्रवार को ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सात Aam Aadmi Party (AAP) राज्यसभा सांसदों के Bharatiya Janata Party (BJP) में विलय को मंजूरी दे दी। इस विलय में शामिल प्रमुख नामों में Raghav Chadha, Ashok Kumar Mittal, Harbhajan Singh, Sandeep Pathak, Vikramjit Singh Sahni, Swati Maliwal और Rajender Gupta शामिल हैं। यह कदम न केवल इन सांसदों के लिए व्यक्तिगत है, बल्कि यह ऊपरी सदन की गतिशीलता को हमेशा के लिए बदल देगा।

आमतौर पर, जब कोई सांसद अपना दल बदलता है, तो 'एंटी-डिफेक्शन' नियम (Anti-defection law) लागू होता है और उनका पद खाली हो जाता है। लेकिन यहाँ स्थिति अलग थी। राज्यसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत, यदि किसी दल के कुल सांसदों का दो-तिहाई हिस्सा दूसरे दल में जाता है, तो इसे 'विलय' माना जाता है और एंटी-डिफेक्शन नियम लागू नहीं होता। AAP की कुल 10 सीटों में से 7 सांसदों का जाना इस सीमा से अधिक था, जिससे यह कानूनी रास्ता खुला रहा।

राज्यसभा की सीटों में भारी बदलाव

इस विलय का सबसे सीधा असर राज्यसभा की सीटों की गिनती पर पड़ा है। आंकड़े देखिए तो तस्वीर स्पष्ट है:

  • बीजेपी की ताकत बढ़ी: BJP की सीटें 106 से बढ़कर 113 हो गई हैं।
  • AAP कमजोर हुई: AAP की सीटें 10 से घटकर मात्र 3 रह गई हैं।

राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ये सात सांसद अब BJP के सदस्य के रूप में दर्ज किए गए हैं। यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि एक औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया थी जिसे पूर्ण किया गया। स्रोतों के अनुसार, यह निर्णय लेने से पहले सांसदों ने शनिवार को अपनी आवेदन पत्रिकाएं जमा कराई थीं, जिन्हें बाद में स्वीकार किया गया।

सांसदों का कहना: सिद्धांतों से विचलन

लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? सातों सांसदों ने बताया कि उन्होंने तीन चरणों से गुजरने का प्रयास किया था। पहले, उन्होंने पार्टी के भीतर काम करने की कोशिश की। फिर, वे असहमति के बावजूद पार्टी में रहकर सुधार लाने का प्रयास करते रहे। अंत में, उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यह संभव नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि AAP अपने मूल सिद्धांतों और विचारधारा से हट चुकी है। "हमने महसूस किया कि हमारी ऊर्जा और अनुभव को सकारात्मक राजनीति में लगाने के लिए BJP एक बेहतर मंच है," उन्होंने कहा। इस बात को लेकर AAP ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसे वे पार्टी के भीतर भंगुरता के संकेत के रूप में देख रही है।

बीजेपी का स्वागत और राजनीतिक प्रभाव

बीजेपी का स्वागत और राजनीतिक प्रभाव

Neetin Gaur, BJP President ने इन नए सदस्यों का मिठाई खिलाकर गर्मागर्म स्वागत किया। यह केवल एक औपचारिकता नहीं थी; यह BJP की ऊपरी सदन में बढ़ती ताकत का प्रतीक था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विलय BJP के लिए एक रणनीतिक जीत है, क्योंकि अब उनके पास कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पास करने के लिए अधिक बहुमत है।

दूसरी ओर, AAP के लिए यह एक बड़ी धक्का है। जो पार्टी कुछ वर्षों पहले एक नई शक्ति के रूप में उभरी थी, उसके लिए अपनी राजनीतिक आधार को बनाए रखना अब और कठिन हो जाएगा। विशेष रूप से दिल्ली और पंजाब जैसे क्षेत्रों में, जहाँ AAP की मौजूदगी मजबूत थी, इस खबर का असर दिख सकता है।

Frequently Asked Questions

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एंटी-डिफेक्शन नियम क्या है और इस मामले में क्यों लागू नहीं हुआ?

एंटी-डिफेक्शन नियम के तहत, यदि कोई सांसद अपने दल से अलग होकर दूसरे दल में जाता है, तो उसका पद खाली हो जाता है। हालाँकि, अपवाद तब होता है जब किसी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य दूसरे दल में विलय कर जाते हैं। इस मामले में, AAP के 10 सांसदों में से 7 सांसदों ने विलय किया, जो दो-तिहाई (लगभग 6.6) से अधिक है, इसलिए यह कानूनी रूप से वैध विलय माना गया।

इन सातों सांसदों के नाम क्या हैं?

वे सात AAP सांसद जो BJP में विलय हुए हैं, वे हैं: राघव चड्ढा, अशोक कुमार मिट्टल, हरभजन सिंह, संधीप पाठक, विक्रमजीत सिंह सहनी, स्वती मालियल और राजेंद्र गुप्ता। इन सभी ने शुक्रवार को अपना विलय पूरा किया।

राज्यसभा में BJP और AAP की नई ताकत क्या है?

इस विलय के बाद, BJP की राज्यसभा में सीटों की संख्या 106 से बढ़कर 113 हो गई है। वहीं, AAP की ताकत काफी कमजोर हुई है और उनकी सीटें 10 से घटकर केवल 3 रह गई हैं। यह बदलाव ऊपरी सदन में BJP की बहुमत स्थिति को और मजबूत करता है।

C.P. Radhakrishnan का इस निर्णय में क्या भूमिका थी?

राज्यसभा अध्यक्ष C.P. Radhakrishnan ने सांसदों द्वारा जमा किए गए आवेदन की समीक्षा की और संविधान के प्रावधानों के आधार पर विलय को मंजूरी दी। उन्होंने पुष्टि की कि चूंकि विलय करने वाले सदस्यों की संख्या दो-तिहाई सीमा को पार करती है, इसलिए यह प्रक्रिया कानूनी रूप से सही है।

AAP ने इस विलय पर क्या प्रतिक्रिया दी है?

AAP ने इस विलय को खारिज करते हुए इसे पार्टी के भीतर भंगुरता के संकेत के रूप में वर्णित किया है। पार्टी ने इस कदम का विरोध किया था, लेकिन राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा दिए गए निर्णय के बाद इसे स्वीकार करना पड़ा। यह घटना AAP की संगठनात्मक इकाई के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।